Project Anmol Mushkan

S.Gangulyहमारा देश संतो का देश हैं। पूरे संसार को आध्यात्मिक ज्ञान से आत्मिक सुख-शान्ति एवं हमेशा खुशा रहने का मार्ग दर्शाया हैं। हम अभी भी अपने अन्दर के ताकत को सही इस्तेमाल नहीं कर पाये हैं।

कुछ ऐसे देश के भविष्य - अनमोल बच्चे हैं जो आस-पास अनुकूल वातावरण के आभाव से अपने मुस्कान खो रहे हैं।

हमारा संस्था 1997 से इसी के लिए हमेशा प्रयासरत हैं। देश के भविष्य यह बच्चे व नौजवानों के हाथों स्वरोजगार का ताकत दिया हैं। बनारस - विश्व्व का एक महत्वपूर्ण संस्कृतिक व कला का केन्द्र हैं और प्राचीन काल से परम्परागत् वस्त्र के लिए विषेश स्थान पाया हैं। हमारे संस्था परम्परागत् वस्त्र-कालीन आदी के डिजाइनों को नया आधुनिक तरिके से सजाने के कला का विकसित कर काफी सारे शिक्षीत बेरोजगार एवं परम्परागत् कलाकार को सम्मानित रोजगार का मार्गदर्शन का सफल प्रयास किया हैं।

अभी तक संस्था 450 नवयुवक/नवयुवती एवं बच्चो को हस्त-कला एवं कलाकृति के माध्यम से देश-विदेशो में सम्मान के साथ रोजगार दिलाने में सहायता की हैं।

संस्था के संचालक कवि गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर के स्थापित शान्ति निकेतन से शिक्षा प्राप्त कर 1997 से उनके पिताजी के प्रेरणा से चिन्मयी कला निकेतन का नींव रखा। तब से आज तक संस्था ‘एकला चलो रे‘ कि आधार पर पूर्णरुप से अग्रणी हैं।

हमें बहुत कुछ करना हैं हम सभी देश के एवं विषेश कर बनारस के भाई-बन्धु माता-पिता से अनुरोध करते हैं कि अपने छोटे से परिवार के लिए तो सब जीते हैं पर जो आन्नद जरुरतमन्द बच्चे असहाय- भटकता हुआ नौजवान नवयुवक/नवयुवती समाज के असहाय माता-पिता के थोड़ी सी सहायता कर उनका अनमोल मुस्कान लौटाना जो उनका हक हैं ऐसा आन्नद और किसी में नहीं मिल सकता।

श्री स्नेहासिश गांगुली
(निदेशक / ट्रस्टी)
चिन्मयी कला निकेतन